जिला- दुर्ग
राज्य -छ ग
शीर्षक - स्त्री
जमाना स्त्री पर हजार बंदिशें लगाता क्यों है,
कोमल नाजुक कलियों को सताता क्यों है ।
जी लेने दे बेपरवाह तुम्हारी ही तो बीज हैं,
जन्म देकर दुनिया में हर पल डराता क्यों है ।
महज़ मनोरंजन की वस्तु समझा है ज़ालिमों,
गंदी मानसिकता अपनी पर इतराता क्यों है ।
नियत गलत पर भी दोष स्त्री का ,वाह री दुनिया !
बेगुनाह बेटियों के चलन पर तानें सुनाता क्यों है ।
कपड़ों की नाप से नापते चरित्र यही ईल्जाम है,
फिर ढँकी हुई काया पर भी नियत गड़ाता क्यों है ।
ऊँची उड़ान भरने पंख दिये जिस मात-पिता ने,
घायल मन सूनी गोद कर उन्हें रुलाता क्यों है ।
रक्त भरे नयनों से रुदन करती उस माँ को देखो प्रभु,
व्यथित हो पूछती 'अनु' लोग कहते तूझे विधाता क्यों है ।।
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