जिला: रायपुर ।
राज्य: छत्तीसगढ़ ।
विषय: स्त्री ।
शीर्षक: स्त्री के स्वरूप ।
विधा: छंद-मुक्त कविता ।
संपर्क: 6264189643 ।
दिनांक: 01/9/2024,रविवार ।
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स्त्री के स्वरूप
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स्त्री है,संसार की एक अनोखी कृति--
माँ,पत्नी, बहन और है पुत्री नाम ,
स्वरूप होता, पर रिश्ता है अलग ही ।
स्त्री ही है देवी स्वरूपा--
ये हैं,कष्टहरनी व दुष्टों की विनाशनी ,
और संरक्षक रूपा हैं सिंहवाहिनी ।
ज्ञानदात्री और हैं इसकी भंडारी---
और हैं हंसवाहिनी, वीणावादिनी,
विनयशील,प्रकाशक जीवनदायनी ।
नारायणी, नारीत्व, सतीत्व, त्यागिनी--
गृहिणी और हैं परिवार की संरक्षणी,
सम्पर्पण,त्याग,उदारता की पुजारनी ।
पतिव्रता,सहगामी हूँ मैं देवी तुल्या--
मैं ही लक्ष्मी,उमा भारती व हूँ काली,
सब रूपों से, मैंने जगत् को सजाया ।
आज अमानवीय व्यवहारों से--
स्त्री की अस्मिता क्यों लुट रही,
लोग नैतिकता क्यों आज भूला रहे ।
कानून व सामाजिकता का डर नहीं --
दानववृति मानवों का कोई वजूद नहीं,
कठोर सजा हो और ये घृणा काबिल।
स्त्री का हरदम,हर रूप में--
करना होगा,उसका उचित सम्मान ,
तभी रहेगी ,ये धरती गुलज़ार ।
स्त्री बिन धरा की कल्पना अधूरी है--
और अधूरा-सा लगेगा , ये संसार ,
बेटी बचाओगे,तभी नवकृति पाओगे।
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मौलिक रचना, बोरियकला, रायपुर ।
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