Saturday, August 31, 2024

रायपुर से हिम्मत सिंह अरमो की रचना- मनमीत

कवि: हिम्मत सिंह अरमो ।
जिला: रायपुर  ।
राज्य: छत्तीसगढ़  ।
विषय: मनमीत  ।
शीर्षक: मनमीत ।
विधा: छंद-मुक्त कविता ।
मोबाइल: 6264189643  ।
दिनांक: 30/8/2024  ।
   ====÷÷÷÷÷======

     मनमीत 
   *********

तुम्ही मेरे मनमीत हो - - -
तुम्ही मेरे प्रियवर हो ,
तुम्हें पाने जग को हारा ,
पीया मैंने भक्तिरस विष प्याला ।

कहूँ मैं सबसे,तुम मेरे रखवाले- - -
तुम्ही हो मेरे मनमीत प्यारे  ,
लागी प्रीत मन ही मन तुझसे  ,
मैं तो अपना सुध-बुध खोई  ।

अपनों का संग है छोड़ा - - -
और भटक रही हूँ  दर-दर ,
कहाँ छुपे हुए हो, मेरे मनमीत, 
तुम्हारे दर्श को कब से तरस रही ।

तेरी छवि कैसी होगी--
मनमीत बन ढूंढ रही ,
मुझको भी, मालूम नहीं, 
ना ही कोई बता रहा  ।

फिर भी डूबी हूँ, तेरे प्रेमरस- - -
क्या जादू किया है मुझ पर तुमने ,
मैं तो बावरी हो गई, तेरी याद में  ,
इतने निर्दयी मत बनो मेरे मीत ।

तुम तो जगत के दायनीधि हो -- -
तुम्ही सबकी मुरादें पूरी करते हो ,
मुझ पगली को कैसे भूले हो ,
तुम्ही तो मेरे दिल अज़ीज़ हो  ।

मुझे तुम किस रूप में---
कहाँ मिलोगे, अब तो बता दो  ,
अब अपनी ज़िद छोड़ दो ,
तुम ही तो, मेरे मनमीत हो  ।

मुझसे क्या नाराज़गी है--
दिलदार बन, अब तो बता दो ,
तुम्ही बताओ, तुम कैसे मानोगे  ,
अब तो बता दो, बहुत हो चुका है ।

मैं अब सब कुछ छोड़कर ---
 शरणार्थी बन ,तेरे शरण में आई ,
थोड़ी सी जगह, अपने दिल में दे दो,
मुझ दुखियारी तुम ही एक सहारा  ।

मैं तुम्हें क्या नाम दूँ--
किस नाम से पुकारा करूँ, 
मेरी इतनी सी, फरियाद तो सुनो ,
मेरी तपस्या, मेरी मुराद होगी पूरी ।

तुम्ही तो  मेरे मनमीत हो--
तुम्ही मेरे दिलवर हो, 
चाहने वालों को, कभी मायूस ना करें, 
तुम ही तो हो, इस जग के रखवाले ।
      ===÷÷÷÷=====
मौलिक रचना, बोरियकला, रायपुर ।
*****===========*****

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...