जिला: रायपुर ।
राज्य: छत्तीसगढ़ ।
विषय: मन ।
शीर्षक: मन का भटकाव ।
विधा: छंद-मुक्त कविता ।
मोबाइल: 6264189643 ।
दिनांक:25/8/24,रविवार ।
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मन का भटकाव
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मन ही मन में--
क्या सोच लेते हैं ,
कभी ऊँची उड़ान भरते, तो
कभी हताशा भी ला लेते हैं ।
मन का भटकाव होता है--
मन कभी हवा की तरह बहता,
तो,कभी बादलों जैसे उड़ता, पर
इस भौतिक जगत में स्थिर नहीं होता।
जिसने मन को वश में किया--
उसने अपनी मुरादें पूरी किया,
लक्ष्य पर जो सदा अडिग रहा ,
वही इंसान युगपुरूष बन उभरा ।
इस माया-मोह की नगरी में--
सभी का मन उलझते रहता है,
जो संयमित रह,काबू करता है, वही इंसान अपनी मंजिल पाता है ।
प्रलोभन में उलझे रहे सब--
क्या राजा, क्या रंक,
जो इसमें रंग गया,वही इंसान--
जीवन में असफल ही रहे हैं ।
जिसने परमात्मा में मन लगाया--
वही सुखी कहलाया,
मोह-माया का जो त्याग करे ,
सांसारिकता के परे,खुद को पाया ।
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मौलिक रचना, बोरियकला ।
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