पता- रायगढ़ छत्तीसगढ़
विषय -आध्यात्म
विधा-मनहरण घनाक्षरी छंद (कवित्त)
संपर्क- 6266399931
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एक बार तनिक विचार कर मन में तो,
किस लिए मनुज बनके धरा आया रे ?
परिवार भरण पोषण के निमित्त हमें,
विधाता ने अद्भुत मानव क्यों बनाया रे?
बात यह सार्थक समझ मन जिन्हें आई,
उन्होंने देवत्व कर्म करके दिखाया रे!
गुरु मुनि ऋषि ज्ञानी मर्म यह पहचानी,
आध्यात्म ही परम आनंद को बताया रे!(१)
सन्यास का अभिप्राय गुफा या कंदरा नहीं,
समाज में रह कर कर्तव्य निभाया रे!
गृहस्थ सार्थक धर्म पुनीत हो सभी कर्म,
संयम जीवन सदा मंगल ही गाया रे!
एक अंश दान में निकाले धन समय को,
सुयोग्य की सेवा सदा आत्म सुख लाया रे!
जन्म यह सार्थक बनाए धर्म कर्म से ही,
हरि के पावन धाम साथ नहीं माया रे!(२)
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©अरविंद सोनी "सार्थक"
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