राज्य- छत्तीसगढ़
जिला- रायगढ़
विषय- प्रकृति
शीर्षक -"प्रकृति का स्वरूप"
विधा- कविता
संपर्क नंबर- 930 329 98994
*प्रकृति का स्वरूप*
आह प्रकृति! तेरी ही कृति ,
विभिन्न रूपों में तू है सजी।
अद्भुत स्वरूप में तेरा दर्शन,
नित्य वर्तमान है तेरा प्रकटन।
न तेरा आदि न तेरा अंत ,
तेरी परंपरा नित्य निरंतर।
व्यवस्था में सजी है नित वर्तमान,
निश्चित स्वरूप है तेरा आचरण।
रचना विरचना परिवर्तनशील,
यही है तेरा वैभव का रीत।
सभी का है तू पोषण आधार,
सभी का हो रहा यही उद्धार।
प्रकृति के बिना जग लागे सुना
धरा का वैभव रह जाएगी अपूर्ण
आह!प्रकृति, कमनिय रमणीय,
तेरे बिना न किसी का अस्तित्व।
स्वरचित रचना
उर्मिला सिदार
बुलाँकी रायगढ़ छत्तीसगढ़
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