Thursday, June 27, 2024

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद'प्रिय' की रचना- सौंदर्य तेरे रूप का

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- सौंदर्य 
शीर्षक- सौंदर्य तेरे रूप का
विधा- दोहा छंद
संपर्क- 7974389033

सौंदर्य तेरे रूप का; बढ़ता है हर रोज।
आशिक मन में कह रहे; तुझे निकाला खोज।1।

प्रेम के विश्वास से; बढ़ता पल-पल मास।
प्रेम से किये बात को; नाहिं समझ बकवास।2।

दिखे नाहिं जब प्यार तो; मन होता बेचैन।
दिख जाये जब प्यार तो; मन में रहता चैन।3।

 सदैव निश्छल प्रेम से; नित करना हर रोज।
प्रेम विश्वास रोज हो; प्रिये का है खोज।4।

सनम ऐ तेरे साथ हूँ; नित्य सुबह अरु शाम।
ऐ सनम करवाचौथ पे; जीवन तेरे नाम।5।

 मेरे जीवन नाम को; लिख दूँ तेरे नाम।
पलभर में भुलना नहीं; किये प्यार में काम।6।

प्रिये भी है जानता; प्यार बड़ा अनमोल।
प्यार बेकार है नहीं; समझो उसका मोल।7।

         ✍🏻 परमानंद निषाद'प्रिय'
         ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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