राज्य :- छत्तीसगढ
जिला :- रायपुर (अभनपुर)
विधा :- काव्य
शीर्षक :- सरगम
सम्पर्क नंबर :- ९३४०९५६००१
सात सुरों के समूहों को, सरगम हम सब कहते हैं ।
इन्ही सुरों के सिरजन से ही, संगीत अपना बनते हैं ।।
षडज ऋषभ गांधार मध्यम, पंचम धैवत और निषाद ।
अगर सुरों की बात करें तो , सामवेद में वर्णित सात ।
प्रथम सात सुरों से निर्मित ,होते अपना सरगम है ।
जो अधीर कर देता सारे , जीवों का भी तन मन है ।।
मन को सुकून देकर संगीत,आनंदित हमें करते हैं ।
सात सुरों के समूहों को, सरगम हम सब कहते हैं ।।
विद्यार्थी तो एकाग्रता ,साधक ध्यान लगाते हैं ।
सुप्त हुए मन मंदिर में भी, दीपक यही जलाते हैं ।।
वंदेमातरम में बस सरगम, जवां प्राण भर जाते हैं ।
कान्हा की बंसी धुन बनकर, हर प्राणी को रिझाते हैं ।
जीवन साधना का गुर दे दे, सरगम उसको कहते हैं ।
सात सुरों के समूहों को, सरगम हम सब कहते हैं ।।
बसंत कुमार साहू "ऋतुराज"
अभनपुर
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