जिला:-दुर्ग
राज्य:-छत्तीसगढ़
विधा:-काव्य
शीर्षक:-*"संस्कार...''*
मोबाइल:-9754860752
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जैसे शिक्षा जरूरी है,
तो साथ मे संस्कार जरूरी है।
संस्कार को अपनाकर,
सकल कार्य व्यवहार जरूरी है।
संस्कार हो तो,
बोली में मिठास होता है।
फिर न कभी,
संबंधों में खटास होता है।
संस्कार के साथ,
हर कार्य शुभ सा लगता है।
सेवा करने का,
मन में एक भाव जगता है।
संस्कार के होने से,
शिष्टाचार का भाव होता है।
सब अपने हो जाते हैं,
सब पर अपना प्रभाव होता है।
संस्कार हो तो हम,
आंखों के नूर हो जाते हैं।
सबके अहसास में रहते हैं,
न कोई दूर हो पाते हैं।
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