राज्य- छत्तीसगढ़
जिला -रायगढ़
विषय -"मांँ"
शीर्षक-माँ की ममत्व"
विधा- कविता
संपर्क नंबर- 9303298 994
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मांँ संस्कारिक हो संस्कार सिखाती है।
विषम परिस्थिति से हमें धैर्यता सीखाती है।
ममत्व भाव दे हमें भावनाएं जगाती है।
समत्व प्रेरणा दे हमें मांँ उपकार सीखाती है।
मूल्य, चरित्र, नेकी सिखलाती ,
नैतिकता का पाठ पढ़ती है।
न्याय, धर्म, सत्य राह दिखाकर ,
हमें सुपथ सद् मार्ग दिखलाती है।
ज्ञान, विवेक, विज्ञान दाहिनी मांँ,
सद्गुण मार्ग सुपथ गामिनी है मांँ,
ममत्व भाव प्यार प्रचारिका माँ,
परिवार का कल्याण कारिणी है ।
माँ परिवार की प्रेरणा का आधार,
सबको देती है माँ ममत्व प्यार।
मांँ तेरी ममता का तुझे प्रणाम,
जिंदगी भर करें हम तेरा यशगान।
माँ हम सब नित तेरे गुण गाएंगे,
तेरे चरणों में हम शीश झुकाएंगे।
तू सदा खुश रहे जननी जन्मदात्री,
हम ईश्वर से यही कामना करते हैं।
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स्वरचित कविता
उर्मिला सिदार "उर्मी"
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