Wednesday, June 19, 2024

कांकेर से कुसुम जैन की रचना- रानी लक्ष्मीबाई

श्रीमती कुसुम जैन 
जिला -कांकेर
राज्य -छत्तीसगढ़
विषय -- झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ।
शीर्षक- लक्ष्मी बाई 

त्याग तपस्या और बलिदान का ,
 परिभाषा है रानी लक्ष्मीबाई ।
 मातृभूमि की रक्षा के खातिर, 
मर मिटने को सौगंध है खाई।
 घर आंगन में खील खिलाती ,
लता सी कोमल वो मनु।
 देख उसके पराक्रम आज,
 निस्तेज हो रहा था भानु ।
मन में लेकर दृढ़ संकल्प ,
साहस को बनाकर  ढाल ।
लड़ जाती थी रणभूमि में,
 बनकर शत्रु का वो काल।
गति उसकी तड़ीत् जैसी ,
 मर्दानी सी थी उसकी चाल।
 रक्त वर्ण नयन को देखकर
शत्रु का होता था बुरा हाल ।
लक्ष्मी थी या थी वह काली,
या थीं दुर्गा की ही अवतार।
 तलवारों से लड़तीं ऐसे -जैसे 
असुरों का किया था संहार।
वीरांगना लक्ष्मीबाई को ,
याद करेगी सदा ये वतन ।
दुर्गा रूपी इस महारानी को 
 करूं मैं शत-शत बार नमन ।

स्वरचित मौलिक रचना

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