जिला -कांकेर
राज्य -छत्तीसगढ़
विषय -- झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ।
शीर्षक- लक्ष्मी बाई
त्याग तपस्या और बलिदान का ,
परिभाषा है रानी लक्ष्मीबाई ।
मातृभूमि की रक्षा के खातिर,
मर मिटने को सौगंध है खाई।
घर आंगन में खील खिलाती ,
लता सी कोमल वो मनु।
देख उसके पराक्रम आज,
निस्तेज हो रहा था भानु ।
मन में लेकर दृढ़ संकल्प ,
साहस को बनाकर ढाल ।
लड़ जाती थी रणभूमि में,
बनकर शत्रु का वो काल।
गति उसकी तड़ीत् जैसी ,
मर्दानी सी थी उसकी चाल।
रक्त वर्ण नयन को देखकर
शत्रु का होता था बुरा हाल ।
लक्ष्मी थी या थी वह काली,
या थीं दुर्गा की ही अवतार।
तलवारों से लड़तीं ऐसे -जैसे
असुरों का किया था संहार।
वीरांगना लक्ष्मीबाई को ,
याद करेगी सदा ये वतन ।
दुर्गा रूपी इस महारानी को
करूं मैं शत-शत बार नमन ।
स्वरचित मौलिक रचना
No comments:
Post a Comment