जिला- दुर्ग
राज्य- छ ग
विधा- कविता
विषय - वृक्ष
शीर्षक- काश! पेड़ लगाये होते
काश ! पेड़ लगाये होते,
गर्मी से परेशान न होते ।
बेचैनी अब सही न जाये,
अपनी करनी की सजा पाये ।
हरे-भरे काट दिये जंगल,
जीवन में कैसे हो मंगल ?
बारिश की बूँदो से पनपे,
फल फूल सब इसके तन पे।
उखाड़ दिये पल में ,चौड़ी सड़क किये,
पंछियों के सुंदर घोंसले उजाड़ दिये ।
मानव ही स्वयं ऐसा लकड़हारा है ,
जिसने अपने पैरों में कुल्हाड़ी मारा है ।
भोजन को तरस जायेंगे,
छाँव भी कहाँ से पायेंगे ।
बारिश न होगी धरा जब सूखी होगी ,
धरती माता की पीड़ा विकराल रुप धरेगी ।
वृक्ष न हो तो सूरज की गर्मी तेज लगेगी,
जल ही जीवन है कहने वालों
पिघलती हिम सबको ले डूबेगी,
सबको ले डूबेगी ।।
अनुरमा शुक्ला
दुर्ग छ ग
No comments:
Post a Comment