Thursday, June 6, 2024

दुर्ग से अनुरमा शुक्ला की रचना- काश! पेड़ लगाये होते

कवि- अनुरमा शुक्ला
जिला- दुर्ग
राज्य- छ ग
विधा- कविता
 विषय - वृक्ष
 शीर्षक- काश! पेड़ लगाये होते

काश ! पेड़ लगाये होते,
गर्मी से परेशान न होते ।

बेचैनी अब सही न जाये,
अपनी करनी की सजा पाये ।

हरे-भरे काट दिये जंगल,
जीवन में कैसे हो मंगल ?

बारिश की बूँदो से पनपे,
फल फूल सब इसके तन पे।

उखाड़ दिये पल में ,चौड़ी सड़क किये,
पंछियों के सुंदर घोंसले उजाड़ दिये ।

मानव ही स्वयं ऐसा लकड़हारा है ,
जिसने अपने पैरों में कुल्हाड़ी मारा है ।

भोजन को तरस जायेंगे,
छाँव भी कहाँ से पायेंगे ।

बारिश न होगी धरा जब सूखी होगी ,
धरती माता की पीड़ा विकराल रुप धरेगी ।

वृक्ष न हो तो सूरज की गर्मी तेज लगेगी, 
जल ही जीवन है कहने वालों
पिघलती हिम सबको ले डूबेगी,
सबको ले डूबेगी ।।

अनुरमा शुक्ला
दुर्ग  छ ग

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