जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- संस्कार
शीर्षक- बच्चों को उपहार नही संस्कार दो
विधा- छंद मुक्त कविता
संपर्क- 7974389033
आराम से हमे पहुँचना है,
संस्कारों की ऊंचाई पर।
माता-पिता से मिले उपहार,
भारत देश का यह संस्कार।1।
संस्कार हमको मिलता है,
माता-पिता,घर परिवार से।
बुजुर्गों का सम्मान धर्म हमारा,
उनकी सेवा करना कर्म हमारा।2।
माता है संस्कार की देवी,
अपने बच्चे को सिखाती है।
माता-पिता की अंगूली पकड़,
चलना हम जब सीखते है।3।
भारतीय संस्कृति और संस्कार,
बड़ों का सम्मान करना सिखाती।
संस्कार वो अमूल्य धन है।
जिससे जीवन सुखमय हो जाता।4।
छोटे को प्यार,बड़ो को आदर,
संस्कार का अमूल्य हिस्सा है।
माता-पिता का सम्मान करो,
कभी ना उनका अपमान करो।5।
✍🏻 परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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