जिला,मुंगेली,
राज्य, छःगः,
विषय, अनमोल
शीर्षक, अनमोल,
विधा कविता,
मोबाइल नंबर, 9981830087,
शीर्षक, अनमोल,
माता है अनमोल,नहीं सानी,
वह तो है सुत,सुता के मानी,
लाल,बाल का लालन-पालन,
खुशी मिले उसे,वह पारिश्रमिक।।
निःस्वार्थ भाव के देवी महान,
कलियुग में भी मां,शिखर,स्थान
प्रातःकाल से लग जाती,लाल,
खान-पान से लेकर पठन,बाल।।
खुदा की खुदाई में बड़ा महत्व,
माता को बनाया,फूरसत,तत्व,
ताकि करे अपना दायित्व पूरण
मां अनमोल,बेशकिमती, है धन।।
निज पाईं न रखे चाहत,विशेष,
केवल,सुत,सुता में रहे रमणीक,
सत्य से कलि हर युग औ काल
माँ है मल्लिका फूल,सम,अमोल।।
माँ का ऋणी हैं हम बाल,बाला,
जीवन पर्यन्त करे सेवा,मृणाल,
रुॠण होने माँ का सात जनम,
अहो,अनमोल,धुरी,तुझे,प्रणाम।।
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