जिला,मुंगेली,
राज्य, छःगः,
विषय, प्रलय
शीर्षक, प्रलय
विधा कविता,
मोबाइल नंबर, 9981830087,
प्रलय आता जब बढ़े पाप,
जरा,आधि,व्याधि,संताप,
जब प्रकृति,पर्यावरण आहत,
और कुदरत होता शर्मसार।।
न रह जाता,धर्म,सत्य,अहिंसा,
पाश्चात्य की अंधाधुंध अनुकरण
नारी हो जाती अर्धनग्न,फैशन,
पुरूष घर पे,नारी चले दफ्तर।।
आतंकवाद बढ़े,महंगाई और,
अन्याय,मुनाफाखोरी का रार,
खाने का लार पड़ जाए तब,
आता प्रलय का ताण्ड़व,विभीषिका।।
पेड़ों की कटाई पे लगा,रोक,
जलवायु होगा शुद्ध,निरोगी,
अभी भी समय है रोक,मानव,
अन्यथा पहले पाट पिछे सपाट।।
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