ब्लॉक--आरंग
जिला --रायपुर
राज्य --छत्तीसगढ़
विषय---कविता
शिर्षक---कसक
विधा--छंदमुक्त
मो.-९७५३१६४८८५
दिनांक ३० मई
*कसक*
कसक की कस,बहुत वृहद होना चाहिए
जिन्दा दिली, इंसान को होना चाहिए
जीवन में क्या रखा है, इंसानियत होना चाहिए
पशुओं में ये होता है,तो इंसान में भी होना चाहिए।।
पर्दे के पीछे कलाकार,अभिनय कसक से करता है
इस रंग मंच में हर एक,इंसाँ अभिनय करता है
हर एक पहचाना नहीं जाता, हुनर से जाना करता है
कसक में भी कसक इतनी हो, कि हर कोई करता है।।
अन्धेरे में तीर कहां चलाओगे, नहीं लगता है
उजाले में अंधेरगर्दी, कहां दिल लगता है
आदमी में आदमीयत हो, हर कोई दिल लगाता है
कसक इंसानियत हो तो, जानवर भी दिल लगाता है।।
पर्वतों जैसा विशाल मन काया, होना चाहिए
दिल से दिल मिले,ऐसा दिलदार होना चाहिए
दीपक और बाती में तेल जैसा, साथ होना चाहिए
कसक इतनी की अंधेरे में,रोशनी होना चाहिए।।
कसक की कसक कसकर,अपनी चाहिए
दूसरे भी समझ जाये,कसक ऐसी चाहिए
जीवन तो बहुमूल्य है,जीवन सार्थक चाहिए
बने प्रेरणा हम सभी,मुझे ऐसी कसक चाहिए।।
हरमन कुमार बघेल
(*हरमन*)
आरंग जिला-रायपुर
छत्तीसगढ़
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