Thursday, May 16, 2024

बलौदा बाजार से आर के कुंजाम व्याख्याता की रचना- प्रकृति और मानव

कवि- आर के कुंजाम  व्याख्याता 
जिला- बलौदाबाजार भाटापारा 
राज्य-छत्तीसगढ़
विषय- प्रकृति 
शीर्षक- प्रकृति और मानव 
विधा- कविता 
संपर्क- पं दिनदयाल उपाध्याय वार्ड मेहता नगर भाटापारा 9907670711
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      प्रकृति और मानव
प्रकृति जो मानव निर्मित नहीं, फिर भी हम मानव है, अनजान।
  जीवन हमने उसी पाया धरती, हवा,पानी,अग्नि आकाश सबसे है महान।।
  फिर भी हम मानव समझ नहीं पा रहे, कितने है वनस्पति महान।
  जंगल काटे, पहाड़ काटे, धरती में गर्मी बढ़े मानव कितने है शैतान।।
   जिसने दिया, उसे उजाड़े, प्रदुषण फैलाया कर रहे मनमानी।
 कंपनी लगाया,धुंआ उगलवाया , प्रदुषण बढ़ाया फिर भी प्रकृति सा न कोई सानी।।
   नेता मंत्री ध्यान न देवे, उजड़ रहा है जंगल।
  पैसे उनके जेब में जाते,महलो में बैठ मनाते हैं मंगल।।
  एसी में बैठने वाले ,क्या जाने लू के थपेड़े।
  शुद्ध हवा तो ले नहीं पाते, जंगल बचाने वालों से खड़ा करते हैं बखेड़े।।
  अब तो समझो, क्यों हो रहा बेमौसम बरसात।
   धरती कांपे ग्लोबल वार्मिंग से रोक से तो रोके किसकी है औकात।।
   जंगल उजाड़े, पेड़ लगाए न पानी न रखरखाव हो रहे भ्रष्टाचार शिकार।
  कब समझेंगे देश प्रदेश के नेता,कौन इन सबके जिम्मेदार।।
  शिक्षा से ज्ञान मिले, वनस्पतियों प्रकृति से शुद्ध हवा।
 सही समय में पानी गिरे, जंगल बचाओ यही है, मानव जीवन की दवा।।

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