जिला-महासमुंद
राज्य -छत्तीसगढ़
विषय -जंगल
शीर्षक-जंगल परगे परिया
विधा-कविता
मो. न .८९८२७०३३७०
===जंगल परगे परिया===
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जंगल परगे परिया संगी
बनगे कुकरी फारम पाली।
पाबे कति मेर बने छइया,
उजर परे जंगल के हरियाली।।
गांव-गांव हाथी खुसरत हे
खोजत जंगल के खुशयाली।
खेत-खार ल मता देवत हे
रौनदत हे धान के बाली।।
बानर सेना गिजरत हबे,
गांव शहर मा टोली-टोली।
उजरे जंगल बिना काय करे,
खुसर जथे घर भीतर खोली।।
बड़े-बड़े हे चिमनी भट्ठा,
जगह-जगह हे ईटा भट्ठा।
जंगल खुशियां नोहर होगे,
पाबो अब मन मउहा अड्डा।।
दीपक पटेल- महासमुंद,,,,✍️
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