Friday, May 17, 2024

महासमुंद से दीपक पटेल की रचना- जंगल परगे परिया

कवि -दीपक पटेल 
जिला-महासमुंद 
राज्य -छत्तीसगढ़ 
विषय -जंगल
शीर्षक-जंगल परगे परिया
विधा-कविता
मो. न .८९८२७०३३७०

===जंगल परगे परिया===
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जंगल परगे परिया संगी
बनगे कुकरी फारम पाली।
पाबे कति मेर बने छइया,
उजर परे जंगल के हरियाली।।

         गांव-गांव हाथी खुसरत हे
        खोजत जंगल के खुशयाली।
        खेत-खार ल मता देवत हे
        रौनदत हे धान के बाली।।

बानर सेना गिजरत हबे,
गांव शहर मा टोली-टोली।
उजरे जंगल बिना काय करे,
खुसर जथे घर भीतर खोली।।

         बड़े-बड़े हे चिमनी भट्ठा,
          जगह-जगह हे ईटा भट्ठा।
           जंगल खुशियां नोहर होगे,
         पाबो अब मन मउहा अड्डा।।

दीपक पटेल- महासमुंद,,,,✍️

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