राज्य छत्तीसगढ
जिला दुर्ग
विधा काव्य
शीर्षक मोहनी एकादशी
सम्पर्क ७९७४६३१५२८
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*मोहनी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं*
*मोहनी एकादशी**
स्वर्ग हो गया जब श्री हीन ,
दुर्वासा ऋषि के श्राप से
सब देव गण हो गए दुखी दीन
श्री के वहां से जानें से l
दौड़े गए वे हरी के पास
कुछ उपाय बता दो नाथ
हरी कहे मत छोड़ो आस
समुद्र मंथन करो दानव के साथ l
मंदराचल पर्वत को मथनी बनाया
रस्सी बनाया वासुकी नाग को
समुद्रमंथन से चौदह रत्न पाया
धनवंतरी लेकर आए अमृत कलश को l
दानव लेकर जैसे भागे
अमृत के कलश को
हरि मोहनी रूप लेकर आए
मोहित करने सबको l
मोहनी रूप देखकर,
मोहित हो गए सब
तब दानव से सुधा लेकर
मोहनी बाट रही है अब l
जब जब संकट धरा पर आया
हरि कई अवतार में आए
हरि करते उद्धार भक्तों का
तभी तो तारणहार कहलाएl
वैशाख शुक्ल के एकादशी को
हरि रुप लिए मोहनी के
जो करते मोहनी एकादशी व्रत को
सदा आशीष पाते हरि के l
प्रिया गुप्ता
जामुल
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