राज्य _छतीसगढ
जिला _दुर्ग
विधा _काव्य
विषय _ओ मेरे मन मीत
संपर्क ७९७४६३१५२८
*ओ मेरे मन मीत*
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"मैं" मेरा कहते है लोग,
इस "मै "ने डुबाया है लाखों को
मैने तो कुछ किया ही नहीं
क्यो गलतियां छुपाते है लोग l
"मैं "का मद लोगो में
मदिरा से भी ज्यादा है l
नशा मदिरा का उतर जाता है लोगो में,
"मैं" का नही उतर पाता है l
ओ मेरे मन मीत
मन में ना लाना "मैं" का भाव कभी,
करता रहूं सबसे प्रीत
सुखी रहे संसार सभी l
प्रिया गुप्ता
भिलाई
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