जिला- महासमुन्द
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- "सूरज की किरणें"
विधा- कविता
संपर्क - 9179134271
पिन- 493445
जब सूरज की सहस्त्र किरणें
धरती पर आती हैं।
कोना कोना रौशन करती,
कलियाँ खिल जाती है।।
करता भेद नहीं है सूरज,
न्याय सदा करता है।
मरुथल पर्वत झील ताल में,
नित प्रकाश भरता है।।
मोती जैसा रूप ओस का,
बूँद चमक उठता है।
जलने लगते जीव जगत के,
जब सूरज रुठता है।।
मत छेड़ प्रकृति को ऐ मानव,
वरना पछताओगे।
हरियाली अगर हरोगे वन से,
ठौर कहाँ पाओगे।।
खिले कमल दल सरोवर में,
सूर्यमुखी खेतों में।
खुश रहती कँटीली झाड़ियाँ
मरुथल की रेतों में।।
चमको सूरज बनकर तुम भी,
परहित सीखो जीना।
सुख देकर मिलता जो सुख है,
उस जैसा कोई ना।
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