Saturday, April 27, 2024

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद'प्रिय' की रचना-गर्मी से हाल बेहाल

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- गर्मी 
शीर्षक- गर्मी से हाल बेहाल 
विधा- दोहा छंद
संपर्क- 7974389033

सूरज  गर्मी  दे  रहा; तीखा  बरसे  घाम।
तेज गर्मी उफान पर; तपे सुबह अरु शाम।।1।।

सूरज तपता धूप से; निकल रही है आग।
‌जो भी आते ताप में; दिख जाते हैं काग।।2।।

गर्मी  से  बेहाल  है; मानव  जीवन  आज।
पौधों को काटो नहीं; करो समझकर काज।।3।।

पंछी  तड़पे  नीर बिन; हैं कितने बेहाल।
तड़प रहे हैं प्यास में; संकट है विकराल।।4।।

वृक्षों  को  काटो  नहीं; देते  हैं  यह  छाँव।
वन उपवन को काट कर; खुद न जलाओ पाँव।।5।।

          ✍🏻 परमानंद निषाद'प्रिय'
         ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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