कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- बाल विवाह
शीर्षक- कैसे रूकेगा बाल विवाह?
विधा- छंद मुक्त कविता
संपर्क- 7974389033
नाजुक सी कली हूँ मुझे खिलने तो दो।
घर के आँगन में मुझे चहकने तो दो।।
सपनों के ऊँची उड़ान को मुझे भरने तो दो।
देखा आसमाँ के ख्वाब को मुझे बुनने तो दो।।
कच्ची उम्र में हाथों से कलम न छुड़वाओ।
स्कूल जाने के लिए हाथ में बैग पकड़ाओ।।
कच्ची उम्र में सिंदूर लगाने न दो।
कर्तव्यों के बोझ में मुझे दबने न दो।।
पिया के आँगन मुझे अभी जाने न दो।
छोटी सी उम्र में मुझे बहु बनने न दो।।
माता-पिता बेटी को बोझ न समझना।
बेटी घर के आँगन में सदा चहकना।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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