Monday, July 24, 2023

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद'प्रिय' की रचना- पलकें झपकाना नहीं

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- पलके़
शीर्षक- पलकें झपकाना नहीं 
विधा- छंद मुक्त कविता 
संपर्क- 7974389033

सुंदर पलकें आँख की, रक्षा करती रोज।
कोमल आँखें देखता, जीवन के हर ओज।।1।।

आँखों से आँसूं बहे, कुछ भी पड़ता मार।
तेरे इंतेजार में, पलकें भीगा यार।।2।।

मानव पलकें खींचकर, करें आँख नुकसान।
पढ़ो नहीं नजदीक से, दूर से पढ़ो गान।।3।।

शबनम बूँदें आँख का, लगता मोती चूर।
पलकों से सजता हुआ, सुंदर दिखता नूर।।4।।

सुंदर नयन प्रकाश से, मिलता खुशी अपार।
आँखें पलकों से सजा, देना कभी न भार।।5।।

            परमानंद निषाद'प्रिय'
       ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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