Sunday, July 23, 2023

दुर्ग से अनुरमा शुक्ला की रचना- लिबादा

कवि-  अनुरमा शुक्ला
जिला-दुर्ग, छ.ग.
विषय- लिबास 
विधा - ग़ज़ल( बेबहर)
शीर्षक- लिबादा

माना नया दौर है मगर बचाकर मर्यादा रखो, 
तन और मन पर संस्कारों का लिबादा रखो,

शर्मोहया, सादगी का गहना सुंदरता बढा़ देती है,
तुम न बेशकिमती जवाहरातों का यूँ इरादा रखो ,

पीछे-पीछे भीड़ के दौड़ रहे हो आखिर क्यों ?
खुद के चलने वास्ते जुदा एक सुंदर जादा रखो,

दूसरों से क्या हासिल कर दो नजरअंदाज
जब रश्म  देने की हो तो दिल कुशादा रखो 

होगी खुदा की रहमत से बरकत ये कहती है 'अनु'
मगर जिस्मों की नुमाइश से न कोई इफ़ादा रखो ।

अनुरमा शुक्ला
दुर्ग

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