Friday, June 9, 2023

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद'प्रिय' की रचना- जीने की राह

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- जिजीविषा 
शीर्षक- जीने की राह
विधा- दोहा छंद
संपर्क- 7974389033

तन में जब तक प्राण है; जीने की है चाह।
कोमल शरीर साज के; मानव चलता राह।।1।

सुंदर जीवन साज के; मन में रखना प्राण।
जीवन तो अनमोल है; पढ़ना सदा पुराण।।2।।

मन में रख विश्वास तू; तन में जब तक जान।
सुंदर इस संसार में; नेक कर्म से मान।।3।।

मानव लालच में पढ़ें; खोकर सब ईमान।
मान-सम्मान त्याग के; करो नहीं अभिमान।।4।।

जीवन  गाथा  गा  रहा; सुंदर  है  संसार।
जीवन जीना साज के; करना प्यार-दुलार।।5।।

मन में प्रेमिल रूप का; खिले सदा ही फूल।
जिजीविषा के राह में; मिलता सारे शूल।।6।।

            परमानंद निषाद'प्रिय'
       ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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