Thursday, May 18, 2023

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद'प्रिय' की रचना- हाथी और लोहे की जंजीर

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- जंजीर 
शीर्षक- हाथी और लोहे की जंजीर
विधा- दोहा छंद 
संपर्क- 7974389033

लोहे  की  जंजीर  से; हाथी  बंधे  आज।
बिना डरे सब जी रहे; मानव करता काज।।1।। 

हाथी बड़ा विशाल है; कहते है गजराज।
अद्भुत उसका रूप है; करते हैं वो राज।।2।। 

सुंदर उनका रूप है; बांधों नहिं जंजीर।
हाथी के हुंकार से; हिले सारे अजीर।।3।। 

हाथी  नाम  अनेक  है; धरे  गजानन  रूप। 
जंगल में विचरण करे; गजराज है अनूप।।4।।

            परमानंद निषाद'प्रिय'
       ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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