Friday, May 12, 2023

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद'प्रिय' की रचना-गर्मी से हाल बेहाल

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- गर्मी 
शीर्षक- गर्मी से हाल बेहाल
विधा- दोहा छंद
संपर्क- 7974389033

सूरज  गर्मी  दे  रहे; तीखे  बरसे  घाम।
तेज गर्मी उफान पर; तपे सुबह अरु शाम।।1।।

सूरज तपती धूप से; निकल रही है आग।
‌जो भी आते ताप में; दिख जाता है काग।।2।।

गर्मी  से  बेहाल  है; मानव  जीवन  आज।
पौधों को काटों नहीं; समझकर करो काज।।3।।

पंछी  तड़पे  प्यास  में; कितने  है  बेहाल।
धरा सूखता नीर से; आने को विकराल।।4।।

वृक्षों को कांटों नहीं; मिलेगा नहीं छाँव।
मानव जंगल काट के; ढूँढ रहे हैं ठाँव।।5।।

            परमानंद निषाद'प्रिय'
       ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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