Wednesday, April 19, 2023

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद'प्रिय' की रचना- सीता स्वयंवर

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- स्वयंवर 
शीर्षक- सीता स्वयंवर
विधा- छंद मुक्त कविता 
संपर्क- 7974389033

दशरथ पुत्रवधु जानकी; बनकर आई धाम।
श्रीराम की अर्धांगिनी; सीता जिनका नाम।।1।।

जनक नंदनी जानकी; लक्ष्मी का अवतार
माता ने सबको दिया; सुखमय ये संसार।।2।।

सिय स्वयंवर सभा में; तोड़े धनु श्रीराम। 
जयमाला लिए जानकी; जा पहनाई राम।।3।।

रावण ऋषि के वेष में; भिक्षा मांगे आय। 
सीता हर दशकंठ ने; श्रीलंका ले जाय।।4।।

खोए हुए विलाप में; अवधपुरी के राम।
आँसूं बहते आँख से; हुई सुबह से शाम।।5।। 

रावण के दरबार में; माता करे विलाप।
हे मेरे रघुनाथ जी; हरना दुख संताप।।6।।

झूठे जब आरोप से; किया सीता परित्याग।
मात जानकी अग्नि से; करें मृत्यु की मांग।।7।।

            परमानंद निषाद'प्रिय'
       ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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