कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- स्वयंवर
शीर्षक- सीता स्वयंवर
विधा- छंद मुक्त कविता
संपर्क- 7974389033
दशरथ पुत्रवधु जानकी; बनकर आई धाम।
श्रीराम की अर्धांगिनी; सीता जिनका नाम।।1।।
जनक नंदनी जानकी; लक्ष्मी का अवतार
माता ने सबको दिया; सुखमय ये संसार।।2।।
सिय स्वयंवर सभा में; तोड़े धनु श्रीराम।
जयमाला लिए जानकी; जा पहनाई राम।।3।।
रावण ऋषि के वेष में; भिक्षा मांगे आय।
सीता हर दशकंठ ने; श्रीलंका ले जाय।।4।।
खोए हुए विलाप में; अवधपुरी के राम।
आँसूं बहते आँख से; हुई सुबह से शाम।।5।।
रावण के दरबार में; माता करे विलाप।
हे मेरे रघुनाथ जी; हरना दुख संताप।।6।।
झूठे जब आरोप से; किया सीता परित्याग।
मात जानकी अग्नि से; करें मृत्यु की मांग।।7।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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