नाम: हिम्मत सिंह अरमो ।
जिला: रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक: वतन ।
विधा: छंद-मुक्त कविता ।
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***।। वतन ।।***
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मेरा वतन, मेरा जहाँन है--
शिखर ताज बना है हिमालय,
और पग पखारे जलनिधि,
ऐसा अनूठा पवित्र धाम है ।
गंगा-जमुनी तहजीब है जिसकी --
ऐसे जिसकी विरासत भरी है शान,
क्यों फिर वैमनस्यता है पलती,
हमवतन लोगों के रगो में भी,
बहता खून एक समान है ।
चंद फिरका परस्त लोगों ने---
देश की अखंडता को क्यों है चुनी ,
बरबाद कर रहे इस गुलिस्ताँ वतन को,
देशभक्ति जिनमें झलकता ही नहीं ।
आजादी का अमृत-महोत्सव जारी--
देखा देश ने कई खौफ़नाक मंज़र,
कभी युद्ध तो कभी गंभीर महामारी,
तो कभी बाढ़ तो कभी भारी अकाली,
फिर भी वतन में अब भी खुशहाली ।
ऐ वतन हमारा है प्यारा-प्यारा--
धर्म-संस्कारों का दिखता है नजारा,
आपस में मिलता कितना भाईचारा,
इसलिए कायम है लोगों में याराना ।
""""""""इ ति """""""""
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