नाम: हिम्मत सिंह अरमो ।
जिला: रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक: दहेज ।
विधा: छंद-मुक्त कविता ।
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***।। दहेज ।।***
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समाज की परंपराओं का हिस्सा है---
शादी के बंधन में बंधना व जीना ।
मायका बेटी का एक घर होता--
शादी से ससुराल एक घर होता ।
शादी से बेटी घर से बिदा है होती--
जीवन जीने कुछ प्रेमिल भेंट हैं देते ।
कुछ लोगों ने शादी को अभिशप्त करा
दहेज़ की मांग से परेशान है किया ।
दहेज़ दानव बना, मौतों का कारण--
ससुराल की यातना का है पर्याय ।
बेटी मोटी रकम, दहेज़ की मांग से--
कुँवारी रह जाती है इस बोझ से ।
बेटी भ्रूण हत्या का सबब है बनता--
नारी बिन संसार चक्र अधूरा रहता ।
दहेज़ निषेध कठोर कानून हैं बने--
पर लोभी परिवार इससे कहाँ डरते।
युवा पीढ़ी की जागरूकता से ही--
ये अभिशाप रूपी माँग ना होगी ।
फिजूल की शान-शौकत दे बढ़ावा--
समाज में फैली बुराइयाँ है छलावा ।
आओ हम सब मिलकर संकल्प करें--
दहेज़ लेंगे और ना किसी से माँगेंगे ।
""""""" इति """""""
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