रचनाकार - लीलाधर प्रजापति
जिला - सारंगढ़ बिलाईगढ़
विधा - उल्लाला छंद
विषय - माता रानी
शीर्षक - मातृ वंदना
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// मातृ वंदना //
दुर्गा माँ की वंदना ,
आओ हम निशदिन करें ।
भक्ति मुक्ति की याचना ,
मन - उर श्रद्धा से भरें ।।
माता के नौ रूप को ,
साधकगण हैं पूजते ।
संयम व्रत आराधना ,
मनोकामना माँगते ।।
दया - प्रेम - करुणामयी ,
जगजननी माँ अम्बिके ।
रक्षक पोषक सर्व के ,
तुझसे ही दुनिया टिके ।।
माता रानी की कृपा ,
सबको सहज में मिलती ।
"जय माता दी" बोलिये ,
अद्भुत भाव है खिलती ।।
माता के दरबार में ,
झोली खाली न रहती ।
होते मालामाल हैं ,
जीवन सबकी सँवरती ।।
शक्ति स्वरूपा देवियाँ ,
जाने कितने रूप हैं ।
काली दुर्गा गायत्री ,
सुंदर सत्य अनूप हैं ।।
जय हो माँ भुवनेश्वरी ,
महिमा बड़ी अपार है ,
आज बचा लो विश्व को ,
पीड़ित हम लाचार हैं ।।
माँ ममता की खान है ,
रोग शोक भय हारिणी ।
जग जीवन वरदायिनी ,
आनंद मंगल कारिणी ।।
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