Thursday, February 9, 2023

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद'प्रिय' की रचना- पतझड़ के मौसम

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- पतझड़ 
शीर्षक- पतझड़ के मौसम 
संपर्क- 7974389033

पेड़ों से पत्ता झड़े; पत्ता गिरता रोज।
धूप में पसीना बहे; तपसी बढ़ता रोज।1।

जिंदगी पतझड़ होत है; पेड़ के सुखे डाल।
पेड़ सुखे है धूप में; जीवन जैसे काल।2।

बढ़ता जाता धूप तो; सब होत परेशान।
गर्म हवा के मार से; ब्याकुल है इंसान।3।

ए पतझड़ के मौसम में; जलता सबके पाँव।
नंगें पाँव चलो नहीं; मिलता ना ही छाँव।4।

पतझड़ बना है जिंदगी; सफल करो तुम काज।
जंगल रक्षा के लिए; पेड़ लगाओ आज।5।

            परमानंद निषाद'प्रिय'
       ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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