कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- पतझड़
शीर्षक- पतझड़ के मौसम
संपर्क- 7974389033
पेड़ों से पत्ता झड़े; पत्ता गिरता रोज।
धूप में पसीना बहे; तपसी बढ़ता रोज।1।
जिंदगी पतझड़ होत है; पेड़ के सुखे डाल।
पेड़ सुखे है धूप में; जीवन जैसे काल।2।
बढ़ता जाता धूप तो; सब होत परेशान।
गर्म हवा के मार से; ब्याकुल है इंसान।3।
ए पतझड़ के मौसम में; जलता सबके पाँव।
नंगें पाँव चलो नहीं; मिलता ना ही छाँव।4।
पतझड़ बना है जिंदगी; सफल करो तुम काज।
जंगल रक्षा के लिए; पेड़ लगाओ आज।5।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
No comments:
Post a Comment