कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- नशा मुक्त
शीर्षक- नशा छोड़ों घर को जोड़ों
संपर्क- 7974389033
नशा नरक का द्वार है; सुन लो मेरे यार।
पडे़ नशे में धुत्त हो; जीवन रहे गुजार।1।
पहले पियें शराब ये; मार - पीट फिर होय।
छोड़ गए सारे इन्हें; बचा नहीं घर कोय।2।
शराब से मिलता नहीं; शरीर को रसपान।
तन करता कमजोर है; अरु मिलता अपमान।3।
शराब तो पीना नहीं; करता है नुकसान।
शराब नहीं ओ काम का; शराब के रसपान।4।
शराब होत खराब है; तन होता कमजोर।
करता खराब फेफड़ा; करो नसेड़ी शोर।5।
शराबी तो पीत रहे; शरीर होता नाश।
शराब नशा ए छोड़िए; तन का नहीं विकास।6।
बीड़ी चाह या शराब; होता बहुत खराब।
जीना लंबी उम्र तो; छोड़ना है शराब।7।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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