कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- अहंकार
शीर्षक- अहंकार
संपर्क- 7974389033
मानव के अहंकार से चूर होता है मान।
कोमल है व्यवहार तो हरपल मिले सम्मान।।
मानव तो अहंकार में भूल गया संस्कार।
बड़े-बूढों का मान नहीं भूल गये शिष्टाचार।।
मानव तेरा रूप है करो ना अत्याचार।
हे! मानव चोरी करो दिल से सदा प्यार।।
अहंकार को त्याग कर सदा फैलाओ प्यार।
जीवन जीना प्यार से फैला के संस्कार ।।
शांत विवेक से काम करो होगा सफल काम।
एक दिन जग में होगा रोशन तुम्हारा नाम।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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