नाम: हिम्मत सिंह अरमो ।
जिला: रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक: बेटियाँ ।
विधा : छंद-मुक्त कविता ।
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::।। बेटियाँ ।।::
जिस घर होतीं बेटियाँ---
वह घर स्वर्ग हो जाता है ।
बेटियाँ बेल की तरह होतीं --
जिस परिवार में ब्याही जातीं हैं,
उसकी ही रोशनी बन जाती हैं ।
सृजन शिल्पी होतीं हैं बेटियाँ---
अभिशप्त मानों ना इनको ,
आपके बेटे की जिंदगी हैं बेटियाँ ।
कुछ लोग बेटी-भ्रूण हत्या करते--
क्या होती है इनकी मजबूरी ,
क्या होती है, इक माँ को पीड़ा,
दहेज़ दानव की भेंट चढ़ती हैं बेटियाँ ।
ये ना होती तो हम ना होते ---
जगत की सृजनकार होती बेटियाँ,
जीवन साथी की धरोहर हैं बेटियाँ ।
जीवन की पतवार हैं बेटियाँ--
घर का श्रृंगार हैं बहु-बेटियाँ,
पति का सुख-संसार हैं बेटियाँ ।
संतान सुख की भागीदार हैं बेटियाँ--
माता-- पिता का अश्क हैं बेटियाँ,
घर-परिवार की पालनहार हैं बेटियाँ ।
आओ देखें मिस वर्ल्ड हैं बेटियाँ--
इनकी रक्षा-सम्मान करें ,
रक्षाबंधन की शान हैं बेटियाँ,
सभी का अभिमान हैं प्यारी बेटियाँ ।
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