नाम: एच-एस-अरमो "अरमान " ।
जिला: रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक: वहम ।
विधा: छंद-मुक्त कविता ।
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○•• वहम ••○
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वहम की दीवारों पर--
रिश्तों में तक़रार की इबारत लिखी है।
पवित्र रिश्ते भी अक्सर टूट जाते हैं---
जहाँ वहम पनप जाते हैं ।
सियासत में सियासती लोगों में--
वहम हो तो,मौत की सजा देते हैं ।
वहम एक कमजोरी है--
सच को भी वहम झूठा साबित करता।
सिपाही वहम में कैदी बना डालता---
जज बाइज़्ज़त बरी कर देता ।
वहम भरी जिंदगी न जी तू---
वरना खुशियाँ दूर चलीं जायेंगी ।
अरमान, वहम का घरौंदा न बना ---
वरना जिन्दगीं, परेशां हो जायेगी ।
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