नाम: हिम्मत सिंह अरमो ।
जिला: रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक: कसक ।
विधा: छंद-मुक्त कविता ।
======================
***।। कसक ।।***
======
चाहत पूरी न होने पर--
दिल में कसक होती है ।
कभी खुशी तो, कभी गम होता,
कसक तो दिल पर चोट करता ।
प्रेम की परिभाषा में--
कसक तो दिल पर चोट करता,
कभी नाराज तो कभी इंतजार करता।
अपनों को खो जाने से--
मन बोझिल और कसक तो होती है ।
किसी के साथ बेवजह तक़रार से--
कसक तो स्वाभाविक रूप से होती है।
रिश्तों में दरकार व मनमुटाव पर--
कसक तो होती ही है ।
जालिमों के दिल में--
न दर्द होता है और न कसक ।
फिर भी वे जी लेते हैं--
दयावान को होती बहुत ही कसक ।
कसक कहो या टीस --
देना न कभी भी किसी को ।
कुछ लोग दिल से महसूस करते,
और वे सदा बुझे-बुझे से रहते ।
*******""""""""""""**********
No comments:
Post a Comment