रचनाकार-गोमतीसिंह
जिला-कोरबा
राज्य-छत्तीसगढ़
विषय-स्वैच्छिक विषय#(दर्द)
शीर्षक-दर्द
संपर्क नंबर-8103564763
---पीते होंगे दर्द को पीने वाले ,
हम तो दर्द में जीते हैं।
कैसे बयाँ करें लफ्जों में,
हम जीवन कैसे जीते हैं।
कह पाना आसान नहीं,
हम श्रृंगार कैसे करते हैं;
अश्कों की सुरमा से हम ,
नयनों को सजाए रखते हैं।
कैसे बयाँ करें लफ्जों में,
हम जीवन कैसे जीते हैं।
दाद दिया करते हैं हम ,
अपने लौह निर्मित कणों को,
जो दर्द विदारक ताने सुनकर ,
अपनी जगह पर स्थित होते हैं।
पुकार उठते हैं माँ पृथ्वी को
जब हृदय दर्द से भर जाते हैं;
माँ सीते की तुलना हमसे कहाँ,
इस कराह से शान्त हो जाते हैं।
कैसे बयाँ करें लफ्जों में,
हम जीवन कैसे जीते हैं।
-गोमती सिंह
कोरबा,छत्तीसगढ़
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