नाम:एच-एस-अरमो "अरमान "
शीर्षक: कलयुग का दौर ।
विधा: छंद-मुक्त कविता ।
जिला: रायपुर (छत्तीसगढ़)
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"" कलयुग का दौर """"
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आधुनिकता के दौर में----
रिश्ते क्यों फीके हो चले ,
मानवता अब हिंसक रही ,
बंद कमरों के भीतर में--।।01।।
सामाजिक सरोकार की बातें---
सबब परेशानी का, क्यों लगता--?
कोरोना काल ने,सिखाया बहुत कुछ,
फिर भी, हुई कुछ बुनियादें कमजोर।2
मशीनीकरण के युग में---
मानव मशीन ही ,बन गया,
संवेदना, अब मर चुकी है,
पर उतना ही, गतिमान हुआ ,
इंसान स्वार्थ की चादर ओढ़े--।3।।
बेशक हमने, जमीं-आसमां में--
अपने रखें हैं, अनमोल कदम,
परमाणु शक्ति का, दम भरते,
किन्तु, संतोष की तलाश में भटकते।4
आज हर एक की फितरत हुई---
आगे बढ़ने-निकल जाने की,
कुचल-मसल देता है--
अब दूसरों के खूबसूरत सपने ,
अपने घमंड के सामने--।।5।।
सामरिक हथियारों का खेल--
देश की शक्ति की मिसाल बनी,
क्या, यही विकास को बताती,
फिर देश-विदेश में --
दहशत रहें, क्यों युध्द की--।6।
नफ़रतों के, मन में क्यों बाग सजाते--
नागफनी-सी ,आशा की दौलत लिये,
मरीचिका की , तलाश में भटकते,
तपते अंगारों के रेगिस्तानों तले-।7।
कलयुग के दौर को,बदनाम न करो--
प्रेम-शान्ति के साथ, जीना सीखो ,
औरों में, ढेरों खुशियाँ को लुटाओ ,
सदाचार-भक्ति का पाठ पढ़ाओ ,
सुख-वैभवता के उजाले तुम लाओ।8
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***स्वरचित-प्रस्तुतीकरण ****
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