रचनाकार - अनुरमा शुक्ला
स्थान- दुर्ग छ.ग.
शीर्षक- आरक्षण
संपर्क- 9131777203
प्रतिभावान को पीछे करते हैं,
बातें देश विकास की करते हैं
संख्या देख आरक्षण तय करते
नेता सिर्फ स्वार्थ सिद्ध करते हैं ।
वोटों की राजनीति हो रही है,
मुफ्तखोरी ने बढ़ाई कामचोरी है,
युवाओं में है आक्रोश की ज्वाला-
भविष्य देश की दांव पर लगी है ।
जातिवाद से जन-जन को उकसाकर,
भेदभाव धर्म की आड़ में फैलाकर,
जेबें कर रहे हो तुुम अपनी भारी
बनाते महल दूसरों का घर जलाकर।
उलझनों की जाल में आने वाली पीढ़ी फँसेगी,
भेदभाव से कुंठित युवाओं की मानसिकता रहेगी,
उन्नति में बाधक, ये आरक्षण नहीं नीतिगत ,
इस अन्याय से न जाने कब मुक्ति मिलेगी ?
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