Monday, December 12, 2022

रायगढ़ से उर्मिला सिदार की कृत आलेख- धूप

लेखिका- उर्मिला सिदार
जिला- रायगढ़
राज्य -छत्तीसगढ़
विधा -गद्य 
शीर्षक -धूप 
संपर्क नंबर -930 32 98 994
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धूप को हम सूर्य की प्रकाश से इंगित करते हैं। धूप का स्रोत सूर्य है। सूर्य के बिना प्रकृति में कोई वस्तु के विकास का अस्तित्व नहीं है ।धूप प्रकाश उष्माअर्थात गर्मी प्रदान करता है। सुबह की धूप अनुकूल लगता है एवं दोपहर की धूप ऋतु के अनुसार अगर ठंड दिन है तो सुहाना लगता है।  गर्मी दिन में अधिक गर्मी होने से शरीर के लिए प्रतिकूल होता है ।धूप का उपयोग मनुष्य अपनी आवश्यकता अनुसार करता है। धूप के सही उपयोग से ही शरीर की व्यवस्था का संतुलन बना रहता है। व्यवस्था का संतुलन बने रहने से ही शरीर स्वस्थ रहता है और स्वस्थ शरीर रहने से ही शरीर में कार्य करने की क्षमता बनी रहती है। धूप अनेक बीमारियों के लिए रोग प्रतिरोधक के लिये उपयोगी है एवं धूप से विटामिन डी की प्राप्ति होती है, जो हड्डी को मजबूत और स्वस्थ बनाता है। धूप का प्रयोग अनेक कार्यों में किया जाता है ।जैसे सुखाने के लिए ,ठंड के दिनो में शरीर को ताप देने के लिए और अन्य कामों में भी किया जाता है। धूप की कमिया या ज्यादा होने से व्यवस्था में समस्या आती हैं ।जिसके कारण विकास रुक जाता है ।अतः मनुष्य जाति को धूप का सदुपयोग कर विकास के सहयोगी बनकर भागीदारी करना चाहिए। धूप का स्रोत सूर्य है ।सूर्य के बिना प्रकृति का कोई अस्तित्व नहीं है। सूर्य प्रकृति का अभिन्न अंग है। सूर्य के बिना दिन रात नहीं होगा और न हीं  ऋतुयें बनेंगी।
धूप का मानव जीवन में विशेष महत्व है।
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उर्मिला सिदार बुलाँकी रायगढ छत्तीसगढ़

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