कवि :- विनोद कुमार चौहान "जोगी"
जिला :- महासमुन्द
राज्य :- छत्तीसगढ़
विषय :- परछाई
विधा :- कविता
शीर्षक :- सखी हमारी परछाई।
संपर्क :- 9669360722
बड़ी अनोखी,
और है पक्की,
सखी हमारी परछाई।
साथ में उठती,
साथ ही बैठे,
संग में लेती अंगड़ाई।
जब हम चलते,
पीछे चलती,
कभी नहीं वो अकुलाई।
ज़रा सांवली,
ज़रा बावली,
कभी नहीं जो शरमाई।
जब हम जाते,
बस्ता लेकर,
संग सखी स्कूल आई।
प्रेम करे है,
ओ प्रकाश से,
छाया से वो घबराई।
जीवन भर जो,
साथ ना छोड़े,
सखी अनोखी परछाई।
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