कवयित्री- उर्मिला सिदार
जिला -रायगढ़
राज्य- छत्तीसगढ़
विधा- पद्य
शीर्षक- *विरह-वेदना*
संपर्क -930 32 98 994
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मन विरह की व्यथा वेदना ,
आज जग में किसे मैं सुनाऊंँ।
विरह की वातावरण सर्वत्र है,
सुखद संस्कार कहांँ से लाऊंँ।
ज्ञान के अभाव में फैला है,
अज्ञानता का अमानवीय राज।
कहीं भी सुखचैन नहीं जग में,
जी रहे हैं जन-जन कुठारा घात।
विरह की वेदना जीने नहीं देती,
विगत से आवत आत्मा देख रही।
कब मुक्ति मिले इस विरह व्यथा से
कब सुख मिले,मन लगाई है आश।
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उर्मिला सिदार बुलाँकी रायगढ़ छत्तीसगढ़
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