कवयित्री-गोमती सिंह
जिला-कोरबा
राज्य-छत्तीसगढ़
विषय-विरह
विधा-छंद मुक्त कविता
शीर्षक-ब्यथा विरह की
संपर्क नंबर-8103564763
----ब्यथा विरह की वो ही जाने,
जिसनें गुजारे तन्हाई में रातें।
शीत लहर भी चुभन भरी होती,
आँखों से गिरते अश्कों की मोती।
आसमान के तारे ,
लगते हैं जैसे बिखरे
हों अंगारे।
महकता फूलों भरा चमन,
विरहणी के हिय में देते हैं अगन।
वर्षा की बूंदे कैसे लगते हैं ,
ये ब्यथित विरहणी ही बयाँ करे ।
मन में हूक उठाती है ,
मिलन की आश भरी सब बातें।
ब्यथा विरह की वो ही जाने,
जिसनें गुजारे तन्हाई में रातें।
।।इति।।
-गोमती सिंह
कोरबा,छत्तीसगढ़
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