लेखिका-उर्मिला सिदार
जिला-रायगढ
राज्य-छत्तीसगढ़
विधा-पद्य
शीर्षक-माँ
सम्पर्क-9303298994
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माँ शब्द का अर्थ है, स्वास्थ्य एवं जागृति के अर्थ में पोषण की क्रिया जिसे मता भाव से जाना जाता है।चाहे स्त्री हो या पुरुष जिसमें ममता का भाव हो ता है वही माँ के स्वरूप में पहचाना जाता है।वर्तमान मे मानव कुल माँ को तीन स्वरुपों में शब्दों के रूप में पहचाना जा रहा है।अर्थ स्वरुप मे नही। पहला माँ जन्म दात्री माँ ,दूसरा गौमाता,तीसरा धरती माँ ये तीनो ममता देने वाली माँओ को पोषण के अर्थ में पहचानना है। ये अपने संबंधी को प्रतिरूप के रूप में समान भाव से ममता भाव देते है। यही माँ की महीमा है।अत एव जिस भाव से हमे माँ से पोषण के अर्थ में ममता मिलती है।उसी भाव से ये तीनो ं माताओं की पोषण हर मनु को श्रद्धा और प्रेम भाव से करना हमारा दायित्व और कर्तव्य है।हम इसी भाव से सेवा कर पाते है तोहमारा पुत्र होना सार्थक है ,नही तो निर्थक है।
*****************************उर्मिला सिदार बुलाँकी रायगढ़ छत्तीसगढ़
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