Sunday, November 20, 2022

महासमुंद से विनोद कुमार'जोगी' की रचना- रानी की वीरगाथा

कवि:- विनोद कुमार चौहान "जोगी"
जिला:- महासमुन्द 
राज्य:- छत्तीसगढ़ 
शीर्षक:- रानी की वीरगाथा
विषय :- रानी लक्ष्मीबाई 
संपर्क:- 9669360722


काशी की पावन माटी ने, दिया देश को शुभ उपहार।
जिसके आगे थर-थर कांपे, भागे दुश्मन हो लाचार।।

चूड़ी-कंगन खेल-खिलौने, का करके उसने परित्याग।
हाथ लिए तलवार खेलती, युद्धनीति से था अनुराग।।
बरछी-ढाल कृपाण कटारी, थे जिसके सुन्दर श्रृंगार।
जिसके आगे थर-थर कांपे, भागे दुश्मन हो लाचार।।

माँग धुली यौवन में फिर भी, सहज लिया सबको संभाल।
उसके आगे घुटने टेके, हुए फिरंगी भी बेहाल।।
डाल दिया हथियार रिपु ने, सुनकर लक्ष्मी की हुंकार।
जिसके आगे थर-थर कांपे, भागे दुश्मन हो लाचार।।

बांध पीठ पर दामोदर को, मर्दानी ने खेले दांव।
विकट घड़ी जब आई फिर भी, फूले ना रानी के पांव।।
अंतिम सांसों तक थामा था, जिसने हाथों में तलवार।
जिसके आगे थर-थर कांपे, भागे दुश्मन हो लाचार।।

जनता के हित के खातिर दी, उसने अपनी खुशियां वार।
जिसके आगे थर-थर कांपे, भागे दुश्मन हो लाचार।।

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