कवियत्री -सावित्री यादव
जिला -बिलासपुर
राज्य - छ. ग.
विषय -ओस
विधा -पद्य
शीर्षक -ओस
सम्पर्क न. -7566685373
ओस की बुँदे हर जगह अपना रूप बदल लेती है।
सीप मे पड़कर मोती और फूलो की सुंदरता बढ़ा जाती है।
ओस की बुँदे रात की सर्दियों का बखान करती है।
हाँ ये ओस की बुँदे सर्द हवाओ काहाल बताती है।
घास पर पड़ी बुँदे मोतियों की लड़ियो सी होती है।
सूरज की रौशनी पड़ते ही चमक जाती है।
हरी चादर पर पड़ी ओस मोतियों की जड़ी लगती है।
ज़ब प्रकृति मे फसलों पर पौधो पर ओस दिखती है।
हरियाली हरा रंग उस पर सफ़ेद ओस का रंग लगती है।
छोटा - छोटा बदल भरे हो थैलियों मे मन को भाती है।
सावित्री यादव
बिलासपुर छ. ग.
No comments:
Post a Comment