लेखिका-गोमती सिंह
जिला-कोरबा
राज्य-छत्तीसगढ़
शीर्षक-शाकाहार
संपर्क नंबर-8103564763
---" शाकाहार " से हमारा तात्पर्य आहार के उस श्रृंखला से है जिसमें किसी जीव जन्तु का स्थान नहीं रहता । ऐसे आहार को शाकाहार कहते हैं।
शाकाहार का महत्व- जिस प्रकार से मिट्टी पर अर्थात जमीन पर जैसा बीजारोपण किया जाता है ठीक वैसे ही पौधे उत्पन्न होते है । हमारे शरीर में मन को मिट्टी यानि की जमीन कहा गया है और उस मन रूपी जमीन में हम जिस प्रकार का आहार ग्रहण करते हैं उसी प्रकार से हमारा आचरण एवं व्यवहार के व्यक्तित्व का निर्माण होता है ।
शाकाहारी आहार जैसे- सब्जियां, भाजी पत्तेदार सब्जी आदि का सेवन करनें से हमारे मन में प्रेम , श्रद्धा, सौहार्द, सहानूभूति दया , सहयोग की भावना का निर्माण होता है । शाकाहारी भोजन को सात्विक भोजन भी कहा जाता है। इन्हीं सब प्रभाव के कारण हमारे लिए शाकाहारी भोजन महत्वपूर्ण भूमिका रखता है ।
जबकि वहीं जीव जन्तु आदि का सेवन करनें से हमारे मन में क्रोध, वहशीपन आदि उत्पन्न होते हैं। अतः हमें सर्वदा शाकाहार का वरण करना चाहिए। जिससे हम एक दयामय, करूणामय और प्रेममयी व्यक्तित्व का निर्माण कर सकें। और उच्चब्यक्तित्व से ही स्वच्छ समाज एवं राष्ट्र तथा स्वच्छविश्व की स्थापना संभव हो सकता है।
।।इति।।
-गोमती सिंह,कोरबा,छत्तीसगढ़
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