Thursday, November 10, 2022

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद'प्रिय' की रचना- गुरू की महिमा

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
शीर्षक- गुरू की महिमा
संपर्क- 7974389033

गुरू ज्ञान भंडार है,शिक्षा इनसे पाय।।
हममें है अज्ञानता, ज्ञानी हमें बनाय।१।

शिक्षा देते हैं गुरू, गुरू बढ़ाया ज्ञान।
बिना विचारे ज्ञान लें, तो ना पाया मान।२।

मिला गुरू से ज्ञान है ,सदा किया उपकार।
गुरू दिया हमको सभी,सीखा के संस्कार।३।

है द्वितीय शिक्षक गुरू, प्रथम गुरू है मात।
ज्ञान बताते हैं गुरू,सबको होता  ज्ञात।४।

गुरुवर एक मिशाल है,देकर हमको ज्ञान।
हरपल देता है रहा,गुरु शिक्षा का ज्ञान।५।

गुरू दिया है आपने,शिक्षा बारम्बार।
शिक्षा से हमको मिला, उज्जवल सा व्यवहार।६।

प्रिये सदा करता रहा,गुरुवर तुम्हें प्रणाम।
गुरू बताये राह में,चलना मेरा काम।७।

हमे मिला जो ज्ञान है,कभी भूल ना पाय।
जो मन से शिक्षा दिए,व्यर्थ कभी ना जाय।८।

मन की है यह भावना,गुरू ज्ञान भण्डार।
 हमें मिला सच्चा गुरू,अरू मिला संस्कार।९।

शिष्यों पर होता गुरू,हरपल ही अभिमान।
शिष्य सभी करते यहाँ, गुरुवर का सम्मान।१०।

            परमानंद निषाद'प्रिय'
       ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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